यमन के जाने-माने प्रमुख सुन्नी मुफ्ती ने एक दूसरे को काफ़िर कहने से परहेज़ करने की ताकीद की है। यमन में मौजूद शाफेई पंथ के प्रसिद्ध आलिमे दीन और प्रमुख मुफ़्ती शेख सह्ल इब्राहीम ने उग्रवाद और तकफीरी कार्यवाहियों के सिलसिले से क़ुम में दो दिवसीय कान्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए एक दूसरे को काफ़िर कहने से परहेज़ करने की ताकीद करते हुए कहा कि कुरआनी आयात ने मुसलमानों को दूसरे धर्मों और मज़हबों के साथ अमन और शांति से जीने की दावत दी है।
इसलिए मुसलमानों का कर्तव्य है कि वह आपस में एकता, एकजुटता और भाईचारे का माहौल पैदा करें और एक दूसरे को कुफ्र का आरोप लगाने से परहेज़ करें। उन्होंने कुछ इस्लामी देशों द्वारा तकफीरी षड़यंत्र को दी जाने वाली सहायता की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन देशों की दौलत खुद उन्हीं की जनता पर खर्च होनी चाहिए न कि अपने देश की पूंजी से तकफीरीत के लिए सहायता उपलब्ध करायें। मुफ्ती ने कहा कि इस्लामी देशों में मतभेद और फूट डालने वाले चैनलों पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है साथ ही यह भी जरूरी है कि जनता को तकफीरियों के अपराधों से अवगत कराया जाए।
26 नवंबर 2014 - 17:23
समाचार कोड: 654239
यमन के जाने-माने प्रमुख सुन्नी मुफ्ती ने एक दूसरे को काफ़िर कहने से परहेज़ करने की ताकीद की है।